‘मसला-ए-फ़िलस्तीन’‬…’ क्यों जारी है जंग!..”सलाहुद्दीन अय्यूबी ने ‘बैतुल मुक़द्दस


फ़लस्तीन नबियों की सर ज़मीन जिसको यहूदी इस्राईली रियासतों में तब्दील करने की कोशिशों में पिछले 125 साल से मस्रूफ़ है।मगर फ़लस्तीन जो न कभी इन यहूदियों का वतन था और न है ।1300 सदी क़ब्ल मसीह में यहूदी पहली दफ़ा इस इलाक़े के मक़ामी क़बाईल को क़त्ल करके इस इलाक़े में आबाद हुवे थे । दसवीं सदी क़ब्ल मसीह में हज़रत सुलेमा अलैहिस्सलाम ने सबसे पहले बैतुल मक़्दस और हैक़ले सुलेमानी को तामीर करवाया । मगर इसके बाद यहूदी (जो उस वक़्त बनी इस्राई कहलाते थे) आपस में लड़कर दो हिस्सों में तक़सीम हो गये और आठवीं सदी क़ब्ल मसीह में असीरिया क़ौम ने इस इलाक़े से
यहूदियों का कला कुमा करके बाहर निकल दिया और छठी सदी क़ब्ल मसीह में बाबूल के बादशाह बख़्नस्र ने जलूबी फ़लस्तीन पर क़ब्ज़ा करके तमाम इस्राईलियों को जिला वतन कर दिया और बैतुल मक़्दस को शहीद करके हैक़ले सुलेमानी को पैबंदे ख़ाक़ कर दिया ।

इस्लाम से क़ब्ल बैतुल मक़्दस पर रोमियों का क़ब्ज़ा था जिन्होंने यहूदियों का बैतुल मक़्दस में दाख़िला कानून्न जुर्म क़रार दिया था । इसके बावजूद यहूदी फ़लस्तीन को अपनी मिरास कहते है । बैतुल मक़्दस जिसको चौदह सौ साल पहले हज़रत उमर फ़रूक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने अपने दौरे ख़िलाफ़त में रोमियों यानी ईसाइयों से आज़ाद करवाया था और यहूदियों को इबादत की इजाज़त दे दी । इसके बाद ईसाइयों ने दोबारा क़ब्ज़ा कर लिया मगर 900 साल पहले दोबारा सलाहुद्दीन अय्यूबी ने इसको ईसाइयों से वापस छीन लिया । बैतुल मक़्दस की तारीख़ बताती है कि बैतुल मक़्दस की तामीर के बाद से यहूदी सिर्फ़ 150 साल आबाद रहे । जबकि हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु के ज़माने से मुसलमान बैतुल मक़्दस में मुस्तक़िल आबाद है और इन चौदह सौ सालों में यहाँ यहूदी कभी नहीं रहे मगर जब 1880 में पूरी दुनिया के मुमालिक़ ने इनकी शाज़िशी से तंग आकर इन यहूदियों को अपने मुल्क़ो से निकाला तो इन्होंने फ़लस्तीन का रुख़ किया ।

क्योंकि उस वक़्त सिर्फ़ मुसलमान ही उनके दुश्मन नहीं थे, बाक़ी ईसाई और क्मूनिस्ट दोनों उनकी जान के दुश्मन थे और आख़िरकार 1880 में चलने वाली यहूदी तहरीक़ के नतीजे में दुनिया भर से यहूदी फ़लस्तीन में जमा होना शुरू हो गये और मक़ामी अरबों से ज़मीने हथियाना शुरू कर दी फिर 1901 में ख़िलाफ़त-ए-उस्मानिया के ख़लीफ़ा सुल्तान अब्दुल हमीद से यहूदी रियासत के क़याम के लिये मदद माँगी गई और उनके इनकार करने के जुर्म में उनके ख़िलाफ़ शाज़िशे करके उनकी हुकूमत का तख़्ता उलट दिया और आख़िरकार मुसलमानों की मर्क़ज़ियत को पारा पारा करके ख़िलाफ़त-ए-उस्मानिया को छोटे-छोटे मुल्क़ो में तक़सीम कर दिया गया और इस तरह मुसलमानों के इत्तहाद को एक यहूदी शाज़िश ने टुकड़े-टुकड़े करके रख दिया ।

यहूदियों की ये रियासत इस्राईल जब क़ायम हुवी तो बहुत छोटी थी मगर आहिस्ता-आहिस्ता ये इतराफ़ के मुस्लिम इलाक़ो पर क़ब्ज़ा करके ये रियास मुस्तक़िल बड़ी होती जा रही है । 1917 में यहूदी सिर्फ़ 4% ज़मीनों के मालिक थे और मुसलमान 90% ज़मीनों के मालिक थे मगर 1994 में यहूदी क़ब्ज़ा 90% हिस्से पर हो गया ।इसी तरह 1917 में यहूदी आबादी सिर्फ़ 56 हज़ार थी जो पाँच साल में 83 हज़ार से ज़्यादा हो गयी ।1922 में यहूदी फ़लस्तीनी ज़मीनों पर इस्राईल का क़ब्ज़ा 1,48,000 एकड़ था जबकि 1939 तक ये क़ब्ज़ा बढ़कर 3,83,350 हो गया ।आज इस्राईल की पार्लियामेन्ट पर जो अज़ीम तर इस्राईल का नक्शा है इसमें मक्का और मदीना समेत तुर्की, ईराक़, उर्दुन, क़ुवैत, शाम और मिश्र शामिल है ।

ये उनके भयानक अज़ाईम की एक हल्की सी झलक है । मस्ला-ए-फ़लस्तीन न ज़मीन का तनाज़ा है न ही कोई सियासी मसअला, बल्कि ये मुसलमानों के अक़ीदे का हिस्सा है । इस्राईल ने मुसलमानों की ज़मीनों से मुसलमानों को बे-दख़ल करके गुन्डागर्दी के बल पर फ़लस्तीनियों की ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर लिया है । इस्राईल को आज सुपर पावर की हिमायत हासिल है, जो हर साल फ़ौजी और माली इमदाद के साथ-साथ अक़्वामी मुताहिदा में भी हर ऐसी क़राबदात को विटो कर देते है जो इस्राईल के ख़िलाफ़ होती है । जबकि 1798 में जब अमेरिका का आईम तैयार हो रहा था उस वक़्त अमेरिका के सद्र बिन यामीन फ़रेन्कलिन ने पार्लियामेन्ट से ख़िताब करते हुवे कहा: ” अमेरिका को सबसे ज़्यादा ख़तरा यहूदियों से है,

क्योंकि यहूदी जिस सरज़मीन पर पहुँचे है वहाँ की अख़्लाक़ियात को तबाह और तिजारती उसूलों सवाबित को बर्बाद कर देते है । अगर ये लोग अमेरिका से निकाल बाहर नहीं किये गये तो एक सौ साल के अन्दर इनका सैले रवाँ अमेरिकी अवाम को उनका महक़ूम बना देगा । और वो इस मुल्क़ का निज़ाम तबाह-ओ-बर्बाद कर देंगे ।” मगर अफसोस उसके बाद के आने वाले अमेरिकी हुक्मरानों ने अपने साबिक़ा हुक्मरानों के सबक को भुला दिया । आज अमेरिका में साठ लाख यहूदी आबाद है । जबकि न्यूयॉर्क शहर में पच्चीस लाख यहूदी आबाद है । जिन्होंने अमेरिका की मईशत अपने क़ब्ज़े में कर रखी है ।

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