अशफाक़ क़ादरी जैसे लोगों के लिये ?


किसी ने बहेलिये से पूछा कि इन परिंदों को क्यों पकड़ते हो तो बहेलिये ने कहा कि ये आसमान में बहुत शोर मचाते है, उस आदमी ने इस पर कहा की शोर तो पिंजरे में भी करते हैं, बहेलिया तब हँस कर  बोला तब उनको ज़िब्ह कर देता हूँ, बहेलिये
का काला तीतर दाना चुगने और अपनी बोली में मशगूल था, नए परिन्दे जाल में लगातार फँस रहे थे.

चालाक बहेलिये ने यह नहीं बताया की यह तो उसका कारोबार है। यह बदसतूर जारी है, चहचहाते परींदे भी है और बहेलिया भी छुरी और जाल के साथ बैठा है.

ख़बर रोज़ होती हैं बेगुनाहों के बरी होने की, गिरफ्तार होने की भी ख़बर होती हैं, कल दिल्ली प्रेस क्लब में जमीयत उलेमा हिन्द और दीगर तंज़ीमो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, मुसलमान नवजवानों की गिरफ्तारी को एक साजिश बताया गया, आंकडे दिए गए जिनके मुताबिक 99 प्रतिशत बेगुनाह साबित हुए.

 कॉन्फ्रेंस में ISIS की निंदा की गयी, कहा गया की एजेंसिया साबित करना चाहती है कि मुसलमानो को ISIS अपनी गिरफ्त में ले चुकी है जब की ऐसा नहीं है, मुसलमानो ने  ISIS के मंसूबे विफल  कर दिए हैं, खुद राजनाथ सिंह ने कहा था कि  भारत का मुसलमान देशभक्त है, मोदी जी ने भी अमेरिका से लौटकर  यही बात दोहराई थी, अब ऐसा क्या हो गया जो  मुसलमान नवजवानों को ISIS का एजेंट बता कर गिरफ्तार किया जा रहा है.

जबकि दूसरी तरफ फिरकापरस्त ताकतें  समाज में नफरत पैदा कर रही हैं, मक्का मस्जिद,माले गाव,समझौता एक्सप्रेस और अजमेर दरगाह शरीफ़ ब्लास्ट कैसिस में इनकी भूमिकाएं सामने आ चुकी हैं.

मौलाना अहमद बुखारी साहब ने भी कल प्रधानमंत्री से अपनी मुलाकात में इस मुद्दे पर बात की.

इस सब के बीच एक चौकाने वाली ख़बर आई है, इस के मुताबिक बरेलवी उलेमा ने कहा है की वहाबी विचारधारा के मुसलमान आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे है, कल एक टीवी चैनल पर भी यही कहा गया.

बरेलवी उलेमा बहुत पहले से ऐसा बोल रहे है।  उन पर में कोई कमेंट करना नहीं चाहता, सिर्फ क़यास के आधार पर ऐसा नहीं बोलना चाहिए, पूरा भारतीय मुस्लिम समाज आतंकवाद के खिलाफ है.

अमरीका और कुछ पश्चिमी देशों ने लादेन और उस जैसे संगठनो को खड़ा किया।बगदादी के पीछे भी वही है ऐसा कहा जा रहा है।  ये अमरीका की सियासत है, कोहरे का भूत खड़ा किया जाता है और फिर खुद ओझा बनकर ये पश्चिमी देश उस भूत का पीछा करते करते उन  देशों में घुस जाता है और अपने हित पूरे करता है.

भारतीय मुसलमान इस को खूब समझता है, हम न तो लादेन समर्थक है और न ही बगदादी और बोको हरम का समर्थन करते है। पूरा भारतीय मुस्लिम समाज इनके विरोध में है, बम धमाके पाकिस्तान और सऊदी अरब मे भी हो रहे है, आतंकवाद से सभी परेशान हैं .

लिहाज़ा वहाबियत से इस आतंकवाद को जोड़ना गलत है। यह इंटरनेशनल सियासत है किसी मज़हब के अंदर मसलकों की लड़ाई नहीं.

बरेलवी उलेमा की इस सोच से पूरे भारतीय मुस्लिम समाज को दुःख पहुंचा है, बेहतर होगा कि आतंकवाद के खिलाफ काम किया जाये और पूरा मुस्लिम समाज एकजुट होकर आतंकवादियों के मंसूबों को नाकाम करे। 

देश में अनगिनत दंगे हुए है, सभी मसलक के लोग उस में मुत्तास्सिर हुए। मस्जिदों और दरगाह  मज़ारों को निशाना बनाया गया। नफरत भरी तक़रीर फिरकापरस्तों की रोज़ सुनते है।  ये दंगे किसने किये।

दंगा पीड़ितों की क्या  कानूनी मदद इन हज़रात ने की।क्या काम  राहत और पुनर्वास का किया. 

हज़रात ,अगर वक़्फ़  या हज़ कमेटी को लेकर आप की शिकायत है तो उस को बैठ कर बातचीत से निबटा लीजिये, अनर्गल बयानबाज़ी की क्या ज़रूरत है.

महान स्वामी जी की बात तो  आप ने सुनी होगी, उन्होंने मीडिया में कहा कि देवबंदी और बरेलवी को हम आपस में लड़वा देंगे.

हज़रात ,  बहेलिये की कहानी पर गौर करें। 
आएं हम सब मिलकर इस सरकारी आतंकवाद का मुकाबला करें और मुस्लिम समाज को तालीम व तरक्की की तरफ ले चलें।

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