कांवरियों का तांडव, कहां हैं तेज ओर आगे रखने वाली मीडिया?


काँवरियों का तांडव खुलकर लूट व जज व पुलिस को भी नहीं बख़्शा, मीडिया ख़ामोश? 
एनबीटीवी इंडिया डॉट कॉम
ज़िला बस्ती- सावन के पहले सोमवार को लेकर सरयु नदी से जल लेकर कांवरियों का जल चढ़ाने का सिलसिला शुरू हो गया है और इस बीच पुलिस और प्रशासन की व्यवस्था पर सवालों के घेरे में आ गई है, लाठी- डंडों से लैस कांवरियों ने सड़क पर जमकर बवाल किया और कई दुकानों में तोड़फोड़ की, कांवरियों ने पुलिसकर्मियों को भी दौड़ा दौड़ाकर पीटा. 
जिलाजज की कार पर हमला कप्तानगंज थाने के चौराहे पर मामूली सी बात को लेकर सैकड़ों कावंरियों ने सबसे पहले गोरखपुर जिले के जिला जज सीके कुलश्रेष्ठ की कार पर हमला बोल दिया जिसमें जज साहब को सिर में गंभीर चोट आई है जब कि उनकी कार को कांवरियों ने तहस नहस कर दिया, इसके बाद स्थिति को कन्ट्रोल करने आ रहे एसडीएम के वाहन पर भी कांवरियों ने हमला बोल दिया, एसडीएम के वाहन पर लाठी और डंडो की बरसात होने लगी जिसमें बैठे एसडीएम ने भाग कर अपनी जान बचाई.
पुलिसकर्मी को दौड़ा- दौड़ाकर पीटाइसके बाद सीओ की बोलेरो पर भी कावंरियो ने ईंट से हमला कर दिया मगर सीओ बाल बाल बच गये, एक पुलिसकर्मीको कांवरियो ने दौड़ा दौड़ा कर पीटा, सिपाही अपनी जान बचाने के लिये एक दुकान में छिप गया,यहांभी बवाली सिपाही को मारने के लिये कोशिश करते रहे.
वहीं इस घटना में घायल हुये जज को स्थानीय लोगो ने तुरंत स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कप्तानगंज में इलाज के लिये लेकर गये.
जहां जज पर हमले की सूचना मिलते ही डीएम और एसपी के हाथ पांव फुल गये और वे आनन फानन में अस्पताल पहुंच कर हालात का जायजा लिया.
काँवरियो का बवाल है जारी प्राथमिक उपचार के बाद जज को डीएम ने निजी वाहन से एएसपी और दो एसओ की निगरानी में फैजाबाद इलाज के लिये भेज दिया.
वहीं काँवंरियो का बवाल रूक रूक कर अभी भी जारी है, हाईवे पर किसी भी वाहन को देखकर बवाल मचाने वाले कांवरिये उन पर टूट पड़ रहे हैं, भीड़ का फायदा उठाकर वह घटना को अंजाम दे फरार हो जा रहे हैं.
डीएम ने कहा- दोषियों पर होगी कार्रवाईपुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे बवालियों की पहचान करने की है.
बहरहाल डीएम ने इस मामले में कहा कि स्थिति अब कन्ट्रोल में है और बवाल करने वाले कांवरियो की पहचान की जा रही है, उन पर कार्रवाई भी होगी.
अब सवाल ये पैदा होता है कि ज़िलाजज व पुलिस से क्यूं नाराज़ हुए काँवरिये ?
क्या कोई रूकावट पैदा की गई, या फिर ये एक चाल है प्रदेश की फ़िज़ा को चुनावी रंग देने के ख़राब करने की?
क्या कहेंगे अब धर्म के ठेकेदार क्या यही है काँवरियों का असली रूप या ये बाहर के बवाली हैं काँवरियों के रूप मैं ?
हां ये ऐसे ही बवाली हैं जैसे मुस्लिमों मैं चंद लोग जो नाम ओर पहचान मुस्लिम की बनाकर मुस्लिमों का ही ख़ून बहाकर मुस्लिमों को बदनाम कर रहे हैं.
मगर अफसोस इतमी बड़ी घटना को दबा रही है देश की मीडिया क्यूं?

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