आगरा (प्रीति शर्मा)। ताजनगरी आगरा में वह 22 साल का हट्टा-कट्टा युवक है, लेकिन अब लड़की बनने के लिए छटपटा रहा है। उसे लगता है कि शरीर भले ही पुरुष का है पर मन से वह लड़की ही है.
इस एक ही जिद, एक ही धुन में उसने चिकित्सकों की देख-रेख में आर्टीफिशियल फीमेल हार्मोंन लेने शुरू कर दिए। एक वर्ष से उसने सलवार-कमीज पहनने के साथ लड़कियों की तरह बाल बढ़ा लिए हैं और बिना मेकअप घर से बाहर नहीं निकलता.
माता-पिता को गवारा नहीं कि खानदान का चिराग लड़की बन जाए। कल उसको मानसिक स्वास्थ्य संस्थान काउंसिलिंग के लिए लेकर आए थे.
शहर के प्रतिष्ठित परिवार के बेटे राहुल (काल्पनिक नाम)
जैसे मामले दस लाख में एक मिलते हैं। एमबीए कर चुके राहुल ने बताया कि बचपन से ही उसे लड़कियों का साथ अच्छा लगता था। हायर स्टडीज के लिए उसके माता-पिता ने एनसीआर भेज दिया। वहां हॉस्टल में लड़कों के साथ रहने पर इस कदर घबराहट होती थी कि वह बाथरूम में जाकर फूट-फूट कर रोता था.
इसी वजह से कुछ ही दिन में हॉस्टल छोड़ दिया। तनाव में रहने लगा तो आत्महत्या का भी प्रयास किया। फिर मैंने घरवालों को समस्या बताई तो वे सकते में आ गए। अब वे पिछले एक माह से मेरी काउंसिलिंग करा रहे हैं।
इसलिए होता है ऐसा
यह मामला ट्रांस सेक्सुअलिज्म का है। इसमें लड़के अथवा लड़की को लगता है कि उसकी आत्मा किसी गलत शरीर में प्रवेश कर चुकी है। केस की स्टडी कर रहे मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक दिनेश राठौर ने बताया कि इस स्थिति के लिए दिमाग का हिस्सा हाइपोथैलेमस जिम्मेदार होता है, जो इमोशंस का निर्धारण करता है। मेल और फीमेल के इमोशंस अलग-अलग होते हैं.
ट्रांससेक्सुअल केसों में मेल के हाइपोथैलेमस में फीमेल के इमोशंस बनने लगते हैं। इस वजह से लड़का खुद को लड़की के रूप में देखता है। हालांकि शारीरिक और मेडिकल परीक्षण के दौरान उसके भीतर कोई कमी नहीं पाई जाती.
दाढ़ी आनी बंद, बाल हुए लंबे
फीमेल हार्मोंस लेने के कारण राहुल की दाढ़ी आनी बंद हो गई है। सिर के बाल लंबे हो गए हैं। थैरेपी के बाद उसमें इतना आत्मविश्वास आ गया है कि अब बाजार खुद के कपड़े खरीदने जाता है लेकिन मेकअप करके सबके के सामने जाने से कोई गुरेज नहीं.
सर्जरी के लिए जाएगा थाईलैंड
उसने बताया कि जेंडर बदलवाने के लिए थाईलैंड के चिकित्सकों से बात चल रही है। चूंकि थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में जेंडर चेंज कराने के मानक सरल हैं, इसलिए वह बाहर ही सर्जरी कराऊंगा। मुझे पता है कि सर्जरी के बाद बाहरी अंग तो महिलाओं की तरह विकसित हो जाएंगे, पर मैं कभी गर्भधारण नहीं कर सकता.
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