हिन्दु धर्म और इसलाम धर्म मे औरतों के अधिकार- ?


"एस एम फ़रीद भारतीय"

*पति के मर जाने पर पत्नी को. साथ में जला देने वाले आज हमारीे शरीयत में दखल दे रहे हैं*

1➡.हिदुं धर्म  मे पति के मरने के बाद लडकी को पति के साथ चिता मे जिंदा जला देते बाद मे  मुसलमान राजाओं और अगंरेजो ने इस भयानक रिवाज को समाप्त  किया.

2➡. हिंदु धर्म  मे विधवा लडकी को दोबारा शादी का अधिकार नहीं है जबकि इसलाम धर्म मे 4 महीने के बाद दोबारा शादी कर सकती है.

3➡. इसलाम धर्म मे  एक पुरूष 4 लडकियों से जरूरत के तहत शादी कर सकता लेकिन ये इसलाम मे 4 लडकियों से शादी करना जरूरी नहीं हैं Quraan ही पृ्थ्वी पर एक मात्र  केवल एेसी किताब जो कहती है कि तुम केवल एक ही औरत से शादी करो बाईबल और वेद मे के अनुसार आप हजारों औरतों से शादी कर सकते हो.

5➡. जबकि हिदुं धर्म मे आप 100, 500 ,1000 , 15000  हजार औरतो से शादी कर सकते हो.

6➡. अगर आप महाभारत अनुशासन पर्व Chapter no. 15 पढते हैं तो इसमें लिखा है कि Shree Krishna के 16000 हजार बिवियाँ थी.

8➡. महाराजा दशरथ के 3 बिवियाँ थी.

9➡. अगर आप भागवत पुराण शलोक नबंर 9/6/25-28,30 पढते है तो उसमें लिखा है कि युवानाशव  नामक एक राजा था उसके 100 बिवियाँ थी.

10➡. हिंदु धर्म मे औरतों का  जमीन जायदाद मे कोई हिस्सा नहीं है । जबकि इसलाम धर्म  दुनिया का पहला धर्म  है जिसने  1450  साल पहले औरतों को औलाद कम ज़यादा या होने न होने के ऐतिबार से  12.50% से लेकर 50% percent तक पति और बाप की तमाम माल और जायदाद हिस्सा दिया है.

11➡. इसलाम मे औरत काजी के जरिए तलाक ले सकती या अपने पति से अलग हो सकती लेकिन हिदुं धर्म मे औरत को ये अधिकार नहीं है,ज़िन्दगी भर ज़ुल्म सहती रहे.

12➡. हिंदू धर्म मे एक औरत 5 पति रख सकती है जैसे दृोपति (Dropti) के 5 पति थे 5 पाडँव जबकि इसलाम मे एक औरत सिर्फ  एक ही पति रख सकती है दूसरा हरगिज नहीं । इसलिए के अगर एक से ज़यादा पति हो तो बच्चा किस का है  ये पता नहीं चलेगा और बाप एक ही होता है.

13➡. अगर आप भगवत गीता (9/32) उसमें लिखा है कि औरत की उतपत्ति पाप योनि से हुई है जबकि इसलाम धर्म में कहा गया कि ईश्वर ने मर्द औरत को समान रूप से बनया है.

15➡. रामचरितमानस ( 59/5) में कहा गया है कि ढोल , गँवारू , शुद्र , पशु और नारी ये सकल ताड़न के अधिकारी हैं । जबकि इसलाम में कहा कि इनके साथ अच्छा सलूक करो.

अब जाने सही मैं यूनिफार्म सिविल कोड क्या है-?

हमारे भारत देश में,
हिन्दुओं के लिये हिन्दू मैरिज एक्ट है, जो जैसा उत्तर भारत के हिंदुओं के लिए है वैसा दक्षिण भारतीय हिंदुओं के लिए नही है.

हिन्दू मैरिज एक्ट के अनुसार पिता की तरफ से सात पीढ़ियों व माता की तरफ से पांच पीढ़ियों में आपसी रिश्तेदारी में शादी नही हो सकती, लेकिन दक्षिण भारत के हिंदुओं में लड़की की अपने सगे मामा से शादी हो सकती है, मतलब हिन्दू मैरिज एक्ट यँहा असफल हो जाता है.

सिखों का आनंद मैरिज एक्ट जिसमें विधवा सिक्ख औरत के ऊपर जो पुरुष चादर डाल देता है या चूड़ी पहना देता है या फिर हाथ पकड़ लेता है वो बिना शादी व गुरु ग्रन्थ साहिब के फेरे लिए बिना उस आदमी की बीवी बन जाती है, आप लोगों ने इस प्रथा पर एक हिन्दी फ़िल्म है, *एक चादर मैली सी* देखी होगी.

गोआ में हिन्दू मैरिज एक्ट लागू नहीं है.
पांडीचेरी में फ्रेंच मैरिज एक्ट है.
पारसियों का अपना मैरिज एक्ट है.

तो बताइये भारत सरकार कौन सा यूनिफार्म  सिविल कोड एक्ट लागू करना चाहती है?

भारत का यूनिफार्म सिविल कोड एक्ट है स्पेशल मैरिज एक्ट है जिसमें कोर्ट मैरिज होती है, क्या भारत सरकार ने यह निर्णय कर लिया है कि वो सभी धर्मों के पर्सनल लॉ को समाप्त कर अब केवल कोर्ट मैरिज को ही मान्यता देगी.

इसलिए यह स्पस्ट हो जाना  चाहिए.

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