एक बार एक महफ़िल मैं बुज़ुर्ग के एक लड़की जाकर खड़ी हुई चेहरे पर झलकता गुस्सा ?
बुज़ुर्ग ने पूछा - बोलो बेटी क्या बात है?
लड़की ने कहा- बुज़ुर्गवार हमारे समाज में लड़कों को हर तरहां की आजादी होती है,
वो कुछ भी करे, कहीं भी जाए उस पर कोई खास टोका टाकी नहीं होती, लेकिन
बुज़ुर्ग मुस्कुराए और कहा, कि बेटी तुमने कभी लोहे की दुकान के बाहर पड़े लोहे के गार्डर देखे हैं?
ये गार्डर सर्दी, गर्मी, बरसात, रात दिन इसी प्रकार पड़े रहते हैं.
इसके बावजूद इनका कुछ नहीं बिगड़ता और इनकी कीमत पर भी कोई फ़र्क नहीं पड़ता.
लड़कों के लिए कुछ इसी प्रकार की सोच है समाज में.
अब तुम चलो एक सुनार का दुकान में,
जहां एक बड़ी तिजोरी, उसमें एक छोटी तिजोरी, उसमें रखी छोटी ख़ूबसूरत सी डिब्बी में रेशम पर नज़ाकत से रखा चमचमाते हीरे मोती होते हैं...?
क्योंकि जौहरी जानता है कि अगर हीरे या मोती में ज़रा भी खरोंच आ गई तो उसकी कोई कीमत नहीं रहेगी.!
समाज में बेटियों की अहमियत भी कुछ इसी तरहां की होती है, जो पूरे घर को रोशन करती झिलमिलाते हीरे मोतियों की तरहां, ज़रा सी खरोंच से उसके और उसके परिवार के पास कुछ नहीं बचता...!
बस यही फ़र्क है लड़कियों और लड़कों में...!
पूरी महफ़िल में चुप्पी छा गई,
उस बेटी के साथ पूरी महफ़िल की आँखों में छाई नमी साफ-साफ बता रही थी लोहे और हीरे-मोती में फर्क क्या है...?
दोस्तों मेरी सभी से गुज़ारिश है इस मैसेज को अपनी बहन बेटियों को ज़रूर पढ़वायें जो ज़माने की चकाचौंध मैं अपनी कीमत को कम करना चाहती हैं
शुक्रिया के साथ
आपका ख़ादिम
एस एम फ़रीद भारतीय
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