बुलंदशहर कोतवाली मैं लग रहे मोबाइल टावर की सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों की अवहेलना कर नई शर्ते बनाना क्या जायज़ है...?
ख़बर एनबीटीवी इंडिया
बुलंदशहर- टावर लगाने वाली कम्पनी ने विरोध जताने पर जो परमीशन विरोध जताने वाले पूर्व पालिका पार्षद व स्थानीय निवासियों को दिखाई उस अनुमतिपत्र मैं भी कॉलम सात मैं साफ़ लिखा है कि किसी भी प्रकार का विरोध दर्ज होने पर लगे हुए टावर को हटाना ही नहीं होगा बल्कि उस जगह का सौंदर्यकरण भी कम्पनी अपने ख़र्च से करेगी.अब सवाल ये पैदा होता है कि माननीय सर्वोच्च अदालत के दिशा निर्देशों को विरूद्ध क्यूं नई शर्तें तय कर टावर लगाने की अनुमति प्रदान की गई, जब सर्वोच्च न्यायालय ये तय कर चुकी कि आबादी से पांच सौ मीटर दूर टावर को ज़रूरत के आधार पर ही लगाया जा सकता है, ऐसे मैं जिस टावर के पचास मीटर के दायरे मैं हज़ारों लोग रहते हों और विरोध दर्ज हो चुका हो तब टावर का निर्माण करना कानून ही नहीं बल्कि लिखित मैं दी गई शर्तों का भी खुला उल्लंघन है.
कोतवाली नगर के साथ बुलंदशहर के प्रशासनिक अधिकारियों को कानून का मान रखना चाहिए, इस टावर निर्माण को तुरंत रोक लगाई जाये, टावर कम्पनी के स्टाफ़ द्वारा हठधर्मी और जबरन टावर लगाने की वजह से स्थानीय निवासियों मैं भारी रोष व्यक्त है, लिहाज़ा हालात की गंभीरता को देख जनहित के साथ सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन तुरंत करना चाहिए, एनबीटीवी इंडिया को उम्मीद है ज़िला प्रशासन इस पर तुरंत रोक लगायेगा.
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